बोर
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मानसिक हलचल को कतारबध्द करने का प्रयास
आफिस के काम के लिये कुछ नये प्रेजेन्टेशन फार्मेट तलाशते समय गूगल बाबा ने गेपमाईंडर को भी लिस्ट किया।
गेपमाईंडर फाउंडेशन विश्व भर के देशों के सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरण संबधी विकास और पतन के आंकडो को बहुत ही रोचक तरीके से बांट कर विभिन्न प्रकार के अनुसंधानों और शोधों में मदद कर रहा है। इस साईट पर आप विभिन्न आंकडो को अलग-अलग तरीकों से ग्राफ पर प्लाट कर सकते हैं। शिक्षा और शोध के क्षेत्र के पाठकों के लिये ये बहुत ही काम की जानकारी हो सकती है।
गेपमाईंडर का ये प्रेजेन्टशन मुझे बहुत भाया -
(साभार - गेपमाईंडर एंव यूट्यूब)
आप बाकी कई विडियो इस पेज पर देख सकते है।
- नितिन | Nitin Vyas at 1:25 PM 10 टिप्पणियां
बाल मन बहुत जिज्ञासु होता है, बालक को मन में उठे सवालों का सही समय पर यदि जवाब मिल जाये तो बात ही क्या! यदि सवाल राष्ट्रपति ओबामा जी के लिये हो और जवाब में उनका सिर हाज़िर हो तो क्या कहने!! हुआ यूं कि ओवल आफिस में काम करने वाले कर्मचारी के सुपुत्र को ये जानना था कि क्या राष्ट्रपति जी के बाल उसके बालों के जैसे ही हैं? सवाल का जवाब कुछ ऐसे दिया गया -
(Official White House Photo by Pete Souza)
- नितिन | Nitin Vyas at 3:27 PM 11 टिप्पणियां
दुनिया भर को फ्राईड चिकन खिलाने वाली कंपनी केएफसी अब लुईविल शहर में अब सड़कों पर गड्डे भरकर उस पर अपने नाम का पोस्टर लगाने जा रही है। हर थिगड़े पर लिखा होगा "रिफ्रेशड बाई केएफसी"!
कंपनी ने इस "रिफ्रेश" प्रोग्राम के लिये अमेरिका के शहरों के मेयरों को अपने-अपने शहर को नामिनेट करने को कहा है। लाटरी के द्वारा चयन करके चार शहरों के गड्डों को इस प्रोग्राम के तहत "रिफ्रेश" किया जायेगा।
ऐसा कोई आईडिया अपने देश के बड़े दुकानदारों के दिमाग चढ़ गया तो विवाद ही विवाद और मौज ही मौज! उदाहरण के लिये -
- नितिन | Nitin Vyas at 8:06 PM 12 टिप्पणियां
आफिस से घर लौटते समय कनेक्टिकट नदी के किनारे सूर्यास्त के समय की तस्वीर
- नितिन | Nitin Vyas at 9:19 AM 3 टिप्पणियां
ये तीनों क्या आपको देश के तीन बडे राजनीतिक दलों घटकों को दर्शाते हुए नहीं लगते, बैठे तीनो ऊंचे टीले पर है लेकिन देश की समस्याओं के प्रति उदासीन, अपनी अपनी दिशा तलाशते हुऐ!
इस साल गर्मियों में पूरे परिवार के साथ न्यू जर्सी के अम्यूजमेंट पार्क में सफारी को घूमने का मौका मिला। यहाँ की वेबसाइट के अनुसार अफ्रीका के बाहर विश्व की सबसे बडी ड्राईव-थ्रू सफारी है आज की तस्वीर इस सफारी से है।
- नितिन | Nitin Vyas at 11:04 AM 8 टिप्पणियां
अमेरिका में पतझड समाप्ति की ओर है, पेडों पर पत्तों के रंग हरे से पीले, नारंगी, लाल, गुलाबी रंगों में बदल कर गिर जाते हैं। कुछ तस्वीरें मासेचुसेट्स में मेरे घर के आस-पास से।।
- नितिन | Nitin Vyas at 10:18 AM 14 टिप्पणियां
- नितिन | Nitin Vyas at 11:03 PM 2 टिप्पणियां

(चित्र विकीपिडिया से साभार)- नितिन | Nitin Vyas at 5:22 PM 2 टिप्पणियां
- नितिन | Nitin Vyas at 10:03 AM 3 टिप्पणियां

रंग-ए-खुदा का बाल नायक मोहम्मद एक आठ-नौ वर्षीय नेत्रहीन बालक है। नेत्रहीन बालक अपनी कमजोरियों के बावजूद स्पर्श और सुनने की क्षमता से खुदा के उन रंगो को देख सकता है जो सामान्य लोग नहीं समझ सकते।
मोहम्मद का विधुर पिता उसे तेहरान के नेत्रहीनों के स्कूल से उत्तरी ईरान में अपने गांव छुट्टियों में ले जाता है। गांव में दादी और दो बहनें, मोहम्मद को मिल कर बहुत खुश होते है। दादी गांव के स्कूल के मास्टर से मिल कर मोहम्मद को एक दिन के लिये कक्षा में जाने देती है, पिता दुबारा शादी करना चाहता है उसे लगता है कि एक नेत्रहीन बालक उसके लिये सामाजिक शर्मिंदगी का कारण है। वह जबरदस्ती मोहम्मद को दूर के गांव में एक नेत्रहीन बढई के पास काम सीखने के लिये भेज देता है। इस फैसले से दादी खफा हो जाती है। मोहम्मद के पिता के मानसिक संघर्ष, आशाहीनता और अस्तित्व की लडाई की कहानी देखने लायक है, पिता का खुदा के रंगो को बच्चे के नजरिये से देखने का प्रयास रंग लाता है और वह प्रकृति के रचियता के सामने खुद को समर्पित कर मोहम्मद को वापस ले आता है।
पूरी तरह से काव्यात्मक तरीके से बनाई गई इस फिल्म में ईरान के उत्तरी भाग की प्राकृतिक सुन्दरता को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। पक्षीयों की आवाज और मोहम्मद की प्रतिक्रिया सुनने और देखने का आनंद बयान नहीं किया जा सकता!
बच्चों के माध्यम से सामाजिक आईने को दिखाने की मजीद भाई की एक और शानदार प्रस्तुति!
जरुर देखें
- नितिन | Nitin Vyas at 9:05 PM 5 टिप्पणियां
ईरान के मजीद मजीदी की लिखी और निर्देशित भाई - बहन के रिश्ते पर आधारित ये १९९७ की फिल्म आस्कर पुरुस्कारों के लिये नामांकित की गई थी।
अली (आमिर फारुख हशमियां) अपनी बहन जहारा (बहारे सिद्दीकी) के एकमात्र जोडी फटे जूते सिलवा के लाते समय बाजार में खो देता है। मजदूर पिता और बीमार मां के हालात को ध्यान में रख कर और पिटाई होने डर से दोनों बच्चे ये बात मां-बाप को नहीं बताते हैं। अली और जहारा, अली के फटे हुए जूतों को बारी-बारी से पहन कर स्कूल जाते हैं लेकिन अली पूरे समय जूते खो देने के दुख में इस प्रयास में है कि बहन के लिये जूते कैसे लाये जायें।
बच्चों की भावनाओं, ईरान के सामाजिक वातावरण और भाई-बहन के प्यार को बहुत ही सुन्दर तरीके मजीदी ने फिल्मांकित किया है। फिल्म के अंत में अली का जूतों के लिये दौड में भाग लेना और उसे जीतने (?) का प्रयास बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है।




बोस्टन के बच्चों के संग्रहालय के बाहर का दृश्य, क्या ऐसा नहीं लगता कि ये जनाब इस दुविधा में हैं कि इस कांक्रीट के जंगल में उडूं या नहीं?
- नितिन | Nitin Vyas at 1:43 PM 1 टिप्पणियां
जीतू भाई की हिन्दी ब्लॉगर प्रश्नावली पर मेरे कुछ जवाब -
क्या आपका अपना हिन्दी ब्लॉग है?
- है, इस वक्त आप इसी गरीबखाने पर हैं।
आप रोजाना कितने हिन्दी ब्लॉग पढते है?
दस से बीस तक (नाम फुरसतिया ना हुआ तो क्या फुरसत पर तो अधिकार है मेरा भी!)
आपकी ब्लॉगिंग की प्रेरणा किससे मिली?
आप ही तो है, रोगी बनाके रख दिया है, बाहर मिलो तो निबटते है।
ये तो १०००००००% फीसदी सच है, मानो या ना मानो, सबूत में ये देख लो!
आप हफ़्ते मे कितनी पोस्ट लिखते है?
एक से भी कम , सच्चाई तो ये है कि जनम से ही आलसी हूं!
आप ब्लॉगिंग क्यों करते है?
सुना है ब्लॉगिंग करने से लोग भोंदि*बुद्दिजीवी बन जाते है,इसलिए ट्राई मारा।
*भोंदि - भौंदूओं के पाये जानी वाली वैसी ही वस्तु जो बुद्दिजीवीयों के पास बुद्दी के रुप में होती है
आप अपने ब्लॉग पर क्या लिखना पसंद करते है?
दूसरों का पका पकाया विचार "इंसपायर" हो कर अपनी नाक कलम से गाना लिखना!
आप अपने ब्लॉग पर कितने बड़े लेख लिखते है?
एक पैराग्राफ़ वाले (अब १०० किलो के शरीर में एक पाव का दिमाग है जो १ पैरा लिखने में ही थक जाता है)
आप दिन भर मे कितनी टिप्पणियां करते है?
पाँच से दस टिप्पणियां (प्रेम व्यवहार बनाके रखना पड़ता है, कभी तो लोग उधार चुकाएंगे)
ये बात अलग है कि उधार प्रेम की कैंची है।
हिन्दी चिट्ठाकारों के आपसी विवादो पर आपका क्या सोचना है?
सब टीआरपी का खेल है बाबा - बिना टीआरपी बढाये कोई पुरुस्कार मिलता है क्या!
आपके ब्लॉग पर की गयी टिप्पणी आपको कितनी अच्छी लगती है।
- नए ब्लॉगर की टिप्पणी हमेशा, आशा बंधाती है (पुराने गए तो क्या हुआ, एक नया ग्राहक और बढा)
आप ब्लॉगिंग से कितनी कमाई कर लेते है।
-क्यों बताऊं IRS से छापा पडवाओगे क्या?
वैसे बडों ने समझाया था कि महिलाओं से उमर और पुरुषों से कमाई पूछना अच्छी बात नहीं है।
अब इतने जवाब दे दिये, नंबर का हिसाब भी मैं ही लगाऊं ये तो ठीक नहीं, जीतू भाई कितने नंबर दोगे मुझे?
- नितिन | Nitin Vyas at 6:16 PM 9 टिप्पणियां
श्रेणियाँ मौज
विकिपीडिया के अनुसार दुनिया भर में तितलियों के बहुत सारे पार्क हैं इनमें से एक मैजिक विंग्स मेरे घर से कुछ ही दूरी पर है। मेरी ४ वर्षीया बेटी को यह जगह बहुत पसंद है, इसी पार्क में खींची मेरी कुछ तस्वीरें














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