Saturday, May 23, 2009

जिज्ञासा

बाल मन बहुत जिज्ञासु होता है, बालक को मन में उठे सवालों का सही समय पर यदि जवाब मिल जाये तो बात ही क्या! यदि सवाल राष्ट्रपति ओबामा जी के लिये हो और जवाब में उनका सिर हाज़िर हो तो क्या कहने!! हुआ यूं कि ओवल आफिस में काम करने वाले कर्मचारी के सुपुत्र को ये जानना था कि क्या राष्ट्रपति जी के बाल उसके बालों के जैसे ही हैं? सवाल का जवाब कुछ ऐसे दिया गया -



(Official White House Photo by Pete Souza)

11 टिप्पणियां:

अभिषेक ओझा 5/23/2009 05:42:00 PM  

बाल जिज्ञासा का समुचित उत्तर :) इससे यादा आया व्हाइट हाउस देखने मैं गया था तो एक बच्चे ने हाथ बढाकर अन्दर की घास छू ली फिर अपने बड़े भाई से पूछा कि क्या इसके लिए वो सुरक्षा कर्मी मुझे गिरफ्तार कर सकता है ?

Udan Tashtari 5/23/2009 07:32:00 PM  

बाल मन की बाल जिज्ञासा शांत करने के लिए बाल हाजिर बाल मन की सेवा में.

हिमांशु । Himanshu 5/23/2009 08:29:00 PM  

समुचित उत्तर । एक झटके में ही जिज्ञासा का समूल उन्मूलन ।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey 5/23/2009 10:04:00 PM  

ओह! ओबामा जी भविष्य को सलाम कर रहे हैं!

ताऊ रामपुरिया 5/24/2009 09:32:00 AM  

भाई यही तो कुछ खास बात है अमेरिकियों मे, अगर यही सवाल हमारे यहां हुआ होता तो बालक को डांटकर चुप करा दिया जाता..

ये तो राष्ट्रपति हैं..हमारे यहां तो एक सडे से कलेक्टर या उससे भी नीचे का आफ़िसर हो उसको भी आप नही झुका् सकते इस तरह. फ़िर बडे ताऊओं की तो बात ही क्या?

रामराम.

bhawna 6/09/2009 02:55:00 AM  

बच्चों का मन सरल और सहज होता है उसी तरह उनकी जिज्ञासाएं भी , तस्वीर और तथ्य दोनों बहुत अच्छी लगी । भावना

Shama 6/22/2009 02:44:00 AM  
This comment has been removed by the author.
Shama 6/22/2009 02:53:00 AM  

बोहोत सुंदर ! जिज्ञासा गर बाल सुलभ थी , तो उत्तर भी उसी सरलता से दिया गया !
तसवीर देके हमें अवगत करनेके लिए धन्यवाद ! ये बात जवाहरलाल नेहरू की याद दिला गयी ...उनके बारेमे अपने दादा जी तथा दादी जी से सुना करती थी ..!

खान अब्दुल गफ्फार खान घर पे गांधीजी समेत , बड़ी बड़ी हस्तियों की मीटिंग चल रही थी . खान साहब की बहु रसोई में खाना बना रही थीं .
अचानक से एक बच्चे की तिचाकी खड़ खडाती हुई रसोई में दाखिल हुई....बहु ने उसे अपना बेटा समझ , जोरसे हड़काया ...! पलट के देखा तो नेहरू जी थे ..उन्हें भूख लग रही थी ...!
खानसाहब के पोते की tricycle पे बैठ वो रसोई में पोहोंच गए !

Shama 6/22/2009 03:16:00 AM  

Aapki tippanee ka uttar dena bhool gayi..!
Aapka sawal tha," kya ham aglee peedheeko aisee yaden de payenge?"

keh nahee saktee..( apnee baat kar rahee hun)....maine khud, pichhale bam blast ke baad ek muheem shuru kee hai...qanoonon ke baareme janjagruti failane kee...jab tak ham angrezon ke banaye, 150 saal purane, qanoonon se mukt nahee hote, ham aatank, taskaree in sabse mukt nahee ho payenge...ab jantake haath me hai...apne aapko qaanoonon se avtagat karaye aur phir sarkaar ko ade hathon le..

http://lalitlekh.blogspot.com

is blog pe padhen...
Indian Evidence Act 25/27 ke tehet ek balatkaree ko pakadna mushkil hai...

Ab ek maalika shuru karne jaa rahee hun, jahan, asalee zindagee me dekhi ghatnayon ka byora darj karungi...is qanoon ke rehte kaise,kaise gunehgar nyayalay se chhot gaye...aur naa police kuchh kar payee na, jiske apraadh hua wo...!
Maine ek bade ohdeke police afsar ko zaro zaar rote dekha hai..!Naitik dhairy itnaa giraya gaya tha...nyayalay me..!

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi 6/22/2009 04:55:00 AM  

सरल मन का सरल जवाब।

बवाल 7/05/2009 12:00:00 PM  

प्रिय नितिन भाई,
सिज्दा करने का इससे बेहतर मौका क्या मिलेगा महाशक्ति को। बहुत ही गूढ़ अहसास है यह। आपका आभार इस पोस्ट के लिए।

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