मानसिक हलचल को कतारबध्द करने का प्रयास
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Sunday, December 21, 2008
प्रकृति के रंग ये भी!
आफिस से घर लौटते समय कनेक्टिकट नदी के किनारे सूर्यास्त के समय की तस्वीर
- नितिन | Nitin Vyas at 9:19 AM 3 टिप्पणियां
Monday, November 03, 2008
राजनीतिक दल
ये तीनों क्या आपको देश के तीन बडे राजनीतिक दलों घटकों को दर्शाते हुए नहीं लगते, बैठे तीनो ऊंचे टीले पर है लेकिन देश की समस्याओं के प्रति उदासीन, अपनी अपनी दिशा तलाशते हुऐ!
इस साल गर्मियों में पूरे परिवार के साथ न्यू जर्सी के अम्यूजमेंट पार्क में सफारी को घूमने का मौका मिला। यहाँ की वेबसाइट के अनुसार अफ्रीका के बाहर विश्व की सबसे बडी ड्राईव-थ्रू सफारी है आज की तस्वीर इस सफारी से है।
- नितिन | Nitin Vyas at 11:04 AM 8 टिप्पणियां
Saturday, November 01, 2008
प्रकृ्ति के रंग
अमेरिका में पतझड समाप्ति की ओर है, पेडों पर पत्तों के रंग हरे से पीले, नारंगी, लाल, गुलाबी रंगों में बदल कर गिर जाते हैं। कुछ तस्वीरें मासेचुसेट्स में मेरे घर के आस-पास से।।
- नितिन | Nitin Vyas at 10:18 AM 14 टिप्पणियां
Saturday, October 25, 2008
Thursday, October 23, 2008
कद्दू
६४१ पौंड के साथ ये रहा तीसरा
अंग्रेजी में कहावत है You are what you eat , अब यदि अमेरिकी ये साइज के फल और सब्जी खा रहे हैं तो फिर क्यों मोटापे में विश्व में अग्रणी ना हों :)
- नितिन | Nitin Vyas at 11:03 PM 2 टिप्पणियां
बोस्टन - घोडागाडी और इंडिया स्ट्रीट

मेरा ऐसा सोचना है कि अपने देश में आटो रिक्शा वालों के कारण तांगे वालों की हालत बहुत खराब हो गई होगी और शायद कुछ सालों में तांगे विलुप्त हो जायेंगे।
और चलते-चलते, काश पाटिल साहब आंतकवादियों को ये रास्ता दिखा देते -
Sunday, October 19, 2008
बोस्टन यात्रा
कई शहरों में इन बतखों का प्रयोग अब पर्यटक वाहन के रुप में किया जाता है। बोस्टन शहर की एक बतख

- नितिन | Nitin Vyas at 5:22 PM 2 टिप्पणियां
खिड़कियाँ

- नितिन | Nitin Vyas at 10:03 AM 3 टिप्पणियां
Sunday, September 28, 2008
रंग-ए-खुदा (The Color of Paradise)
रंग-ए-खुदा का बाल नायक मोहम्मद एक आठ-नौ वर्षीय नेत्रहीन बालक है। नेत्रहीन बालक अपनी कमजोरियों के बावजूद स्पर्श और सुनने की क्षमता से खुदा के उन रंगो को देख सकता है जो सामान्य लोग नहीं समझ सकते।
मोहम्मद का विधुर पिता उसे तेहरान के नेत्रहीनों के स्कूल से उत्तरी ईरान में अपने गांव छुट्टियों में ले जाता है। गांव में दादी और दो बहनें, मोहम्मद को मिल कर बहुत खुश होते है। दादी गांव के स्कूल के मास्टर से मिल कर मोहम्मद को एक दिन के लिये कक्षा में जाने देती है, पिता दुबारा शादी करना चाहता है उसे लगता है कि एक नेत्रहीन बालक उसके लिये सामाजिक शर्मिंदगी का कारण है। वह जबरदस्ती मोहम्मद को दूर के गांव में एक नेत्रहीन बढई के पास काम सीखने के लिये भेज देता है। इस फैसले से दादी खफा हो जाती है। मोहम्मद के पिता के मानसिक संघर्ष, आशाहीनता और अस्तित्व की लडाई की कहानी देखने लायक है, पिता का खुदा के रंगो को बच्चे के नजरिये से देखने का प्रयास रंग लाता है और वह प्रकृति के रचियता के सामने खुद को समर्पित कर मोहम्मद को वापस ले आता है।
पूरी तरह से काव्यात्मक तरीके से बनाई गई इस फिल्म में ईरान के उत्तरी भाग की प्राकृतिक सुन्दरता को बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है। पक्षीयों की आवाज और मोहम्मद की प्रतिक्रिया सुनने और देखने का आनंद बयान नहीं किया जा सकता!
बच्चों के माध्यम से सामाजिक आईने को दिखाने की मजीद भाई की एक और शानदार प्रस्तुति!
जरुर देखें
- नितिन | Nitin Vyas at 9:05 PM 5 टिप्पणियां
Thursday, August 14, 2008
बचेहा-ये-आसेमान (Children of Heaven)
ईरान के मजीद मजीदी की लिखी और निर्देशित भाई - बहन के रिश्ते पर आधारित ये १९९७ की फिल्म आस्कर पुरुस्कारों के लिये नामांकित की गई थी।
अली (आमिर फारुख हशमियां) अपनी बहन जहारा (बहारे सिद्दीकी) के एकमात्र जोडी फटे जूते सिलवा के लाते समय बाजार में खो देता है। मजदूर पिता और बीमार मां के हालात को ध्यान में रख कर और पिटाई होने डर से दोनों बच्चे ये बात मां-बाप को नहीं बताते हैं। अली और जहारा, अली के फटे हुए जूतों को बारी-बारी से पहन कर स्कूल जाते हैं लेकिन अली पूरे समय जूते खो देने के दुख में इस प्रयास में है कि बहन के लिये जूते कैसे लाये जायें।
बच्चों की भावनाओं, ईरान के सामाजिक वातावरण और भाई-बहन के प्यार को बहुत ही सुन्दर तरीके मजीदी ने फिल्मांकित किया है। फिल्म के अंत में अली का जूतों के लिये दौड में भाग लेना और उसे जीतने (?) का प्रयास बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है।
Saturday, August 09, 2008
दुविधा
बोस्टन के बच्चों के संग्रहालय के बाहर का दृश्य, क्या ऐसा नहीं लगता कि ये जनाब इस दुविधा में हैं कि इस कांक्रीट के जंगल में उडूं या नहीं?
- नितिन | Nitin Vyas at 1:43 PM 1 टिप्पणियां
Monday, April 28, 2008
हिन्दी ब्लॉगर प्रश्नावली - उत्तर पुस्तिका
जीतू भाई की हिन्दी ब्लॉगर प्रश्नावली पर मेरे कुछ जवाब -
क्या आपका अपना हिन्दी ब्लॉग है?
- है, इस वक्त आप इसी गरीबखाने पर हैं।
आप रोजाना कितने हिन्दी ब्लॉग पढते है?
दस से बीस तक (नाम फुरसतिया ना हुआ तो क्या फुरसत पर तो अधिकार है मेरा भी!)
आपकी ब्लॉगिंग की प्रेरणा किससे मिली?
आप ही तो है, रोगी बनाके रख दिया है, बाहर मिलो तो निबटते है।
ये तो १०००००००% फीसदी सच है, मानो या ना मानो, सबूत में ये देख लो!
आप हफ़्ते मे कितनी पोस्ट लिखते है?
एक से भी कम , सच्चाई तो ये है कि जनम से ही आलसी हूं!
आप ब्लॉगिंग क्यों करते है?
सुना है ब्लॉगिंग करने से लोग भोंदि*बुद्दिजीवी बन जाते है,इसलिए ट्राई मारा।
*भोंदि - भौंदूओं के पाये जानी वाली वैसी ही वस्तु जो बुद्दिजीवीयों के पास बुद्दी के रुप में होती है
आप अपने ब्लॉग पर क्या लिखना पसंद करते है?
दूसरों का पका पकाया विचार "इंसपायर" हो कर अपनी नाक कलम से गाना लिखना!
आप अपने ब्लॉग पर कितने बड़े लेख लिखते है?
एक पैराग्राफ़ वाले (अब १०० किलो के शरीर में एक पाव का दिमाग है जो १ पैरा लिखने में ही थक जाता है)
आप दिन भर मे कितनी टिप्पणियां करते है?
पाँच से दस टिप्पणियां (प्रेम व्यवहार बनाके रखना पड़ता है, कभी तो लोग उधार चुकाएंगे)
ये बात अलग है कि उधार प्रेम की कैंची है।
हिन्दी चिट्ठाकारों के आपसी विवादो पर आपका क्या सोचना है?
सब टीआरपी का खेल है बाबा - बिना टीआरपी बढाये कोई पुरुस्कार मिलता है क्या!
आपके ब्लॉग पर की गयी टिप्पणी आपको कितनी अच्छी लगती है।
- नए ब्लॉगर की टिप्पणी हमेशा, आशा बंधाती है (पुराने गए तो क्या हुआ, एक नया ग्राहक और बढा)
आप ब्लॉगिंग से कितनी कमाई कर लेते है।
-क्यों बताऊं IRS से छापा पडवाओगे क्या?
वैसे बडों ने समझाया था कि महिलाओं से उमर और पुरुषों से कमाई पूछना अच्छी बात नहीं है।
अब इतने जवाब दे दिये, नंबर का हिसाब भी मैं ही लगाऊं ये तो ठीक नहीं, जीतू भाई कितने नंबर दोगे मुझे?
- नितिन | Nitin Vyas at 6:16 PM 9 टिप्पणियां
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Saturday, April 26, 2008
तितलियां
विकिपीडिया के अनुसार दुनिया भर में तितलियों के बहुत सारे पार्क हैं इनमें से एक मैजिक विंग्स मेरे घर से कुछ ही दूरी पर है। मेरी ४ वर्षीया बेटी को यह जगह बहुत पसंद है, इसी पार्क में खींची मेरी कुछ तस्वीरें
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