क्या हम सुधरेंगे?
पहले मूर्तियों का दूध पीना, मछली चिकित्सा के लिये कतार लगाना, फिर
एक ज्योतिषी का खुद की मृत्यु की घोषणा करना और तमाम लोगों का उस खबर का सीधा प्रसारण देखना..
और अब 'एक चम्मच चमत्कारी पानी'...
क्या हम सुधरेंगे?
मानसिक हलचल को कतारबध्द करने का प्रयास
पहले मूर्तियों का दूध पीना, मछली चिकित्सा के लिये कतार लगाना, फिर
एक ज्योतिषी का खुद की मृत्यु की घोषणा करना और तमाम लोगों का उस खबर का सीधा प्रसारण देखना..
और अब 'एक चम्मच चमत्कारी पानी'...
क्या हम सुधरेंगे?
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3 टिप्पणियां:
आपके प्रश्न का उत्तर नारद खोलते ही मिल गया। जब यह नया हिन्दी चिट्ठा देखा - http://tonetotke.wordpress.com/
Murti ko doodh peete to humne bhi dekha tha wo bhi tab jab hum engg college Roorki mein the! Aur sach maniye surface tension ki theory batane wale bhi wahan confused ho gaye the :)
anyway jab zindagi mein lakh pair pataskne pe bhio kuch hota na dikhai de waise log hi aise jhanson mein zaldi aa jate hain.
Ye mansikta tabhi khatma ho payegi jab aam janta apni roz roz ki lachariyon aur bebasi se bahar nikal paye.
बहुत जल्दी । मंज़िल की ओर बड़ रहे है।
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